नवरात्रि के छटवें दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है| ये दुर्गा माँ का छतवा अवतार है| शास्त्रों में कहा गया है कि माँ कात्यायनी कात्यायन ऋषि की पुत्री थीं| इसी के चलते इनका नाम कात्यायनी पड़ गया| माँ कात्यायनी अमोघ फलादयानी मणि गयीं हैं|

वृन्दावन में देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक कात्यायनी पीठ स्थित है। इस मंदिर का नाम प्राचीन सिद्धपीठ में आता है। बताया जाता है कि यहां माता सती के केश गिरे थे, इसका प्रमाण शास्त्रों में मिलता है। नवरात्र के मौके पर देश-विदेश से लाखों भक्त माता के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। बताया जाता है कि राधारानी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए इस शक्तिपीठ की पूजा की थी।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अगर माँ कात्यायनी की पूजा की जाये तो विवाह में आ रही साडी बाधा दूर हो जाती हैं| वही अगर  भक्त्त माँ की सच्चे मन से आराधना करती हैं तो माँ की आज्ञा से व्यक्ति को चक्र जाग्रति की सिद्धियाँ मिल जाती हैं| सिर्फ यही नहीं व्यक्ति रोग शोक संताप और भय से मुक्ति पता है| माँ को प्रसन्न करना आसान है| आइये पढ़ते हैं माँ कात्यायनी की पूजा विधि और आरती और मंत्र|

माँ कात्यायनी की पूजा विधि-

गंगाजल से पूजा स्थल पर छिडकाव करें और माँ कात्यायनी की प्रतिमा  को स्थापित करें| इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें| फिर हाथों में फूल लेकर माँ को प्रणाम करें| इसके बाद माँ को पीले फूल, कच्ची हल्दी की गांठ और शहद अर्पित करें| फिर माँ का प्रिय भोग यानि शहद चढ़ाएं| घर में सभी को प्रसाद वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें|

देवी कात्यायनी का मंत्र-

चन्द्र हसोज्ज वलकरा शार्दू लवर वहना|

कात्यायनी शुभम दध्या देवी दानव घातिनी||

देवी कात्यायनी की आरती-

जय जय अम्बे जय कात्यायनी|

जय जय माता जग महारानी||

बैजनाथ स्थान तुम्हारा|

वहां वारदाती नाम पुकारा||

कई नाम हैं कई धाम हैं |

यह स्थान भी तो सुखधाम है||

हर मंदिर में ज्योति तुम्हारी |

कहीं यौगेश्वरी महिमा न्यारी||

हर जगह उत्सव होते रहते|

हर मंदिर में भक्त हैं ||

कात्यायनी रक्षक काया की|

ग्रंथि काटे मोह माया की ||

झूठे मोह छुड़ाने वाली |

अपना नाम जपाने वाली||

बृहस्पति को पूजा करियो |

ध्यान कात्यायनी का धारियों||

हर संकट को दूर करेगी |

भंडारे भरपूर करेगी ||

जो भी माँ को भक्त पुकारे|

कात्यायनी सब कष्ट निवारे||

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